ऋग्वेद (मंडल 9)
उ॒रुग॑व्यूति॒रभ॑यानि कृ॒ण्वन्स॑मीची॒ने आ प॑वस्वा॒ पुरं॑धी । अ॒पः सिषा॑सन्नु॒षसः॒ स्व१॒॑र्गाः सं चि॑क्रदो म॒हो अ॒स्मभ्यं॒ वाजा॑न् ॥ (४)
हे विस्तृत मार्ग वाले सोम! तुम स्तोताओं को अभयदान देते हुए द्यावा-पृथिवी को मिलाते हुए बरसो. तुम हमें महान् अन्न देने के लिए उषा, आदित्य एवं किरणों को प्राप्त करने की इच्छा करते हुए शब्द करते हो. (४)
O Mon with a wide passage! You shower the hymns while giving them a gift of charity, mixing the diva-prithvivi. You say the words wishing to get Usha, Aditya and Kiran to give us great food. (4)