ऋग्वेद (मंडल 9)
मत्सि॑ सोम॒ वरु॑णं॒ मत्सि॑ मि॒त्रं मत्सीन्द्र॑मिन्दो पवमान॒ विष्णु॑म् । मत्सि॒ शर्धो॒ मारु॑तं॒ मत्सि॑ दे॒वान्मत्सि॑ म॒हामिन्द्र॑मिन्दो॒ मदा॑य ॥ (५)
हे दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम वरुण, मित्र, विष्णु, शक्तिशाली मरुत्, इंद्र एवं अन्य देवों को नशे के द्वारा तृप्त करो. (५)
O glorious and pure Mon! You satisfy Varuna, mitra, Vishnu, the mighty desert, Indra and other gods by intoxication. (5)