ऋग्वेद (मंडल 9)
ए॒वा पु॑ना॒नो अ॒पः स्व१॒॑र्गा अ॒स्मभ्यं॑ तो॒का तन॑यानि॒ भूरि॑ । शं नः॒ क्षेत्र॑मु॒रु ज्योतीं॑षि सोम॒ ज्योङ्नः॒ सूर्यं॑ दृ॒शये॑ रिरीहि ॥ (६)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमें जल, स्वर्ग, गाएं एवं पुत्र-पौत्र दो एवं हमारे खेतों का कल्याण करो. हे सोम! अंतरिक्ष में ज्योतियों को विस्तृत करो एवं हमें चिरकाल तक सूर्य को देखने दो. (६)
O you are pure, Mon! Give us water, heaven, cows, and sons and grandsons, and do good to our fields. Hey Mon! Expand the lights in space and let us see the sun forever. (6)