हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.92.1

मंडल 9 → सूक्त 92 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 92
परि॑ सुवा॒नो हरि॑रं॒शुः प॒वित्रे॒ रथो॒ न स॑र्जि स॒नये॑ हिया॒नः । आप॒च्छ्लोक॑मिन्द्रि॒यं पू॒यमा॑नः॒ प्रति॑ दे॒वाँ अ॑जुषत॒ प्रयो॑भिः ॥ (१)
जिस प्रकार युद्ध में शत्रुवध के लिए रथ तैयार किया जाता है, उसी प्रकार ऋत्विजों द्वारा प्रेरित व हरे रंग वाले सोम देवों के संतोष के लिए दशापवित्र पर जाते हैं. शुद्ध होते हए सोम इंद्र संबंधी स्तोत्रों को प्राप्त करते हैं एवं हव्य अन्रों से देवों की सेवा करते हैं. (१)
Just as a chariot is prepared for enmity in war, similarly, the green-colored Som, inspired by the Ritvijs, goes to Dashapavitra for the satisfaction of the gods. The sanctified somas receive the hymns of Indra and serve the gods from the other. (1)