ऋग्वेद (मंडल 9)
सा॒क॒मुक्षो॑ मर्जयन्त॒ स्वसा॑रो॒ दश॒ धीर॑स्य धी॒तयो॒ धनु॑त्रीः । हरिः॒ पर्य॑द्रव॒ज्जाः सूर्य॑स्य॒ द्रोणं॑ ननक्षे॒ अत्यो॒ न वा॒जी ॥ (१)
एक साथ सींचने वाली एवं परस्पर बहिनों के समान दस उंगलियां सोम को शुद्ध करती हैं. वे उंगलियां धीर सोम की प्रेरक हैं. हरे रंग वाले सोम सूर्य की पत्नी दिशाओं की ओर जाते हैं. सोम तेज चलने वाले घोड़े के समान द्रोणकलश में जाते हैं. (१)
Ten fingers, like watering and inter-sisters, together purify the mon. Those fingers are the motivators of Dhir Som. The green-coloured Mons go towards the sun's wife directions. Som goes to Dronakalash like a fast-moving horse. (1)