ऋग्वेद (मंडल 9)
सं मा॒तृभि॒र्न शिशु॑र्वावशा॒नो वृषा॑ दधन्वे पुरु॒वारो॑ अ॒द्भिः । मर्यो॒ न योषा॑म॒भि नि॑ष्कृ॒तं यन्सं ग॑च्छते क॒लश॑ उ॒स्रिया॑भिः ॥ (२)
जैसे माताएं बच्चे को धारण करती हैं, उसी प्रकार देवों की अभिलाषा करने वाले, अभिलाषापूरक एवं बहुतों द्वारा वरण करने योग्य सोम जल द्वारा धारण किए जाते हैं. पुरुष जिस प्रकार नारी के पास जाता है, उसी प्रकार सोम अपने संस्कृत स्थान में जाते हुए द्रोणकलश में गाय के दूध-दही आदि से मिलते हैं. (२)
Just as mothers hold a child, so so are the desires of the gods, the desire-givers, and the ones who are chosen by many, by the soma water. Just as a man goes to the woman, soma goes to his Sanskrit place and meets cow's milk-curd etc. in Dronakalash. (2)