हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.96.9

मंडल 9 → सूक्त 96 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 96
परि॑ प्रि॒यः क॒लशे॑ दे॒ववा॑त॒ इन्द्रा॑य॒ सोमो॒ रण्यो॒ मदा॑य । स॒हस्र॑धारः श॒तवा॑ज॒ इन्दु॑र्वा॒जी न सप्तिः॒ सम॑ना जिगाति ॥ (९)
देवगण रमणीय एवं प्रसन्रतादायक सोम के पास जाते हैं. शक्तिशाली घोड़ा जिस प्रकार युद्ध में जाता है, उसी प्रकार अनेक धाराओं वाले, अत्यंत बलशाली एवं टपकने वाले सोम इंद्र को नशा करने के लिए द्रोणकलश में जाते हैं. (९)
The devas go to the delightful and refreshing Mon. Just as the mighty horse goes into battle, so the many-streamed, extremely powerful and dripping Som goes to Dronakalash to intoxicate Indra. (9)