हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.97.13

मंडल 9 → सूक्त 97 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
वृषा॒ शोणो॑ अभि॒कनि॑क्रद॒द्गा न॒दय॑न्नेति पृथि॒वीमु॒त द्याम् । इन्द्र॑स्येव व॒ग्नुरा श‍ृ॑ण्व आ॒जौ प्र॑चे॒तय॑न्नर्षति॒ वाच॒मेमाम् ॥ (१३)
लाल बैल जिस प्रकार शब्द करता हुआ गायों के पास जाता है, उसी प्रकार शब्द उत्पन्न करता हुआ सोम धरती और स्वर्ग के पास जाता है. लोग युद्ध में इंद्र के समान ही सोम का शब्द सुनते हैं. सोम सबको अपना परिचय देते हुए जोर से शब्द करते हैं. (१३)
Just as the red bull goes to the cows with the word, so the word mon, producing the word, goes to the earth and to heaven. People hear the word of Som just like Indra in war. Som makes loud words introducing himself to everyone. (13)