हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
अ॒स्य प्रे॒षा हे॒मना॑ पू॒यमा॑नो दे॒वो दे॒वेभिः॒ सम॑पृक्त॒ रस॑म् । सु॒तः प॒वित्रं॒ पर्ये॑ति॒ रेभ॑न्मि॒तेव॒ सद्म॑ पशु॒मान्ति॒ होता॑ ॥ (१)
प्रेरणा करने वाले, स्वर्ण द्वारा शुद्ध होते हुए एवं दीप्तिशाली सोम अपना रस देवों के साथ संयुक्त करते हैं. निचुड़ते हुए सोम शब्द करके उसी प्रकार दशापवित्र की ओर जाते हैं. जिस प्रकार ऋत्विज्‌ यजमान के भली प्रकार बने हुए एवं पशुयुक्त यज्ञगृह में जाता है. (१)
The inspiring, pure by gold and the radiant Soma combines his juice with the gods. In the same way, they go to Dashapavitra by doing the word 'Nikhurta Som'. Just as the ritwijjamaman goes to the well-made and animal-like yajnagriha. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
भ॒द्रा वस्त्रा॑ सम॒न्या॒३॒॑ वसा॑नो म॒हान्क॒विर्नि॒वच॑नानि॒ शंस॑न् । आ व॑च्यस्व च॒म्वोः॑ पू॒यमा॑नो विचक्ष॒णो जागृ॑विर्दे॒ववी॑तौ ॥ (२)
हे सोम! तुम कल्याणकारक, संग्राम में हितकारी एवं आच्छादक तेज को धारण करने वाले हो. तुम महान्‌, कवि, स्तोत्रों की प्रशंसा करने वाले, सबके विशेष द्रष्टा एवं जागरणशील हो. तुम यज्ञ में चमू नामक पात्रों में प्रवेश करो. (२)
Hey Mon! You are going to possess the welfare, the benevolent and the stabbing fast in the struggle. You are great, poet, admirer of hymns, special seers and awakenings of all. You enter the characters named Chamu in the yajna. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
समु॑ प्रि॒यो मृ॑ज्यते॒ सानो॒ अव्ये॑ य॒शस्त॑रो य॒शसां॒ क्षैतो॑ अ॒स्मे । अ॒भि स्व॑र॒ धन्वा॑ पू॒यमा॑नो यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (३)
यश पाने वालों में परम यशस्वी, धरती पर उत्पन्न एवं प्रिय सोम ऊंचे तथा भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर शुद्ध किए जाते हैं. हे सोम! शुद्ध होते हुए अंतरिक्ष में भली प्रकार शब्द करो एवं कल्याणकारक साधनों से सदा हमारी रक्षा करो. (३)
Among those who attain success, the most successful, the earth-born and beloved somas are purified on the dashapavitra made of high and sheep's hair. Hey Mon! Speak well in the space while being cleansed and protect us always with welfare means. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
प्र गा॑यता॒भ्य॑र्चाम दे॒वान्सोमं॑ हिनोत मह॒ते धना॑य । स्वा॒दुः प॑वाते॒ अति॒ वार॒मव्य॒मा सी॑दाति क॒लशं॑ देव॒युर्नः॑ ॥ (४)
हे स्तोताओ! सोम की भली-भांति स्तुति करो, देवों की पूजा करो एवं महान्‌ धन पाने के लिए सोम को प्रेरित करो. स्वादिष्ट सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर छनते हैं एवं देवाभिलाषी बनकर द्रोणकलश में जाते हैं. (४)
This stotao! Praise Soma well, worship the gods and inspire Som to get great wealth. The delicious mons sift over the dashapavitra made of sheep's hair and go to Dronakalash as devabhilashi. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
इन्दु॑र्दे॒वाना॒मुप॑ स॒ख्यमा॒यन्स॒हस्र॑धारः पवते॒ मदा॑य । नृभिः॒ स्तवा॑नो॒ अनु॒ धाम॒ पूर्व॒मग॒न्निन्द्रं॑ मह॒ते सौभ॑गाय ॥ (५)
हजार धाराओं वाले सोम देवों की मित्रता प्राप्त करते हुए उनके नशे के लिए कलश आदि में निचुड़ते हैं. सोम यज्ञकर्म के नेताओं द्वारा प्रशंसित होकर अपने प्राचीन स्थान द्युलोक को जाते हैं एवं महान्‌ सौभाग्य पाने के लिए इंद्र के पास जाते हैं. (५)
The mons with thousand streams get the friendship of the gods and leave in the kalash etc. for their intoxication. Som, admired by the leaders of yajnakarma, goes to his ancient place Duloka and goes to Indra to get great good fortune. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
स्तो॒त्रे रा॒ये हरि॑रर्षा पुना॒न इन्द्रं॒ मदो॑ गच्छतु ते॒ भरा॑य । दे॒वैर्या॑हि स॒रथं॒ राधो॒ अच्छा॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (६)
हे हरे रंग वाले एवं शुद्ध होते हुए सोम! जब हम तुम्हारी स्तुति करें, तब तुम हमें धन देने के लिए आओ. तुम्हारा नशीला रस संग्राम को प्ररेणा देने के लिए इंद्र के पास जाए. तुम देवों के रथ पर बैठकर हमारे सामने आओ एवं कल्याणकारक साधनों द्वारा हमारी रक्षा करो. (६)
O green and pure mon! When we praise you, you come to give us money. Your intoxicating juices go to Indra to inspire sangram. Sit on the chariot of the gods and come before us and protect us by means of welfare. (6)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
प्र काव्य॑मु॒शने॑व ब्रुवा॒णो दे॒वो दे॒वानां॒ जनि॑मा विवक्ति । महि॑व्रतः॒ शुचि॑बन्धुः पाव॒कः प॒दा व॑रा॒हो अ॒भ्ये॑ति॒ रेभ॑न् ॥ (७)
उशना ऋषि के समान स्तोत्र बोलते हुए वृषगण नामक ऋषि इंद्र आदि देवों का जन्म भली प्रकार बताते हैं. अनेक कर्म वाले, पवित्र तेज से युक्त, पापों को नष्ट करने वाले एवं शोभन दिनों वाले सोम शब्द करते हुए पात्रों में जाते हैं. (७)
Speaking the same hymn as The Sage Ushna, the sage named Vrishagana, Indra, tells the birth of the gods. Many workers, full of holy brightness, those who destroy sins and those with a good day go into the characters, doing the word som. (7)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
प्र हं॒सास॑स्तृ॒पलं॑ म॒न्युमच्छा॒मादस्तं॒ वृष॑गणा अयासुः । आ॒ङ्गू॒ष्यं१॒॑ पव॑मानं॒ सखा॑यो दु॒र्मर्षं॑ सा॒कं प्र व॑दन्ति वा॒णम् ॥ (८)
शत्रुओं द्वारा सताए गए वृषगण नाम के ऋषि शत्रुओं से डरकर तेज प्रहार करने वाले एवं शत्रुनाशक सोम को लक्ष्य करके यज्ञशाला में जाते हैं. सोम के मित्र स्तोता सबके अभिगमन योग्य, शत्रुओं द्वारा असह्य एवं छनने वाले सोम के प्रति बाजों के साथ गाते हैं. (८)
The sages named Vrishagana, persecuted by the enemies, go to the yajnashala, aiming at the sharp-hit and the enemy-destroyer Soma, afraid of enemies. Som's friend Stota sings with the hawks to Mon, accessible to everyone, unbearable and pierced by the enemies. (8)
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