ऋग्वेद (मंडल 9)
भ॒द्रा वस्त्रा॑ सम॒न्या॒३॒॑ वसा॑नो म॒हान्क॒विर्नि॒वच॑नानि॒ शंस॑न् । आ व॑च्यस्व च॒म्वोः॑ पू॒यमा॑नो विचक्ष॒णो जागृ॑विर्दे॒ववी॑तौ ॥ (२)
हे सोम! तुम कल्याणकारक, संग्राम में हितकारी एवं आच्छादक तेज को धारण करने वाले हो. तुम महान्, कवि, स्तोत्रों की प्रशंसा करने वाले, सबके विशेष द्रष्टा एवं जागरणशील हो. तुम यज्ञ में चमू नामक पात्रों में प्रवेश करो. (२)
Hey Mon! You are going to possess the welfare, the benevolent and the stabbing fast in the struggle. You are great, poet, admirer of hymns, special seers and awakenings of all. You enter the characters named Chamu in the yajna. (2)