ऋग्वेद (मंडल 9)
आ जागृ॑वि॒र्विप्र॑ ऋ॒ता म॑ती॒नां सोमः॑ पुना॒नो अ॑सदच्च॒मूषु॑ । सप॑न्ति॒ यं मि॑थु॒नासो॒ निका॑मा अध्व॒र्यवो॑ रथि॒रासः॑ सु॒हस्ताः॑ ॥ (३७)
जागरणशील, सच्ची स्तुतियों के ज्ञाता एवं शुद्ध होते हुए सोम चमू नामक पात्रों में बैठते हैं. आपस में मिले हुए, अत्यंत अभिलाषी, यज्ञ के नेता एवं हाथ में कल्याण रखने वाले पुरोहित तथा अध्वर्यु दशापवित्र में सोम को छूते हैं. (३७)
Awakening, the knower of true praises and being purified, sits in the characters called Som Chamu. The leaders of the yagna and the priests who have welfare in their hands and the adhwaryu touch The Som in the Dasapavittra. (37)