हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
आ ह॑र्य॒ताय॑ धृ॒ष्णवे॒ धनु॑स्तन्वन्ति॒ पौंस्य॑म् । शु॒क्रां व॑य॒न्त्यसु॑राय नि॒र्णिजं॑ वि॒पामग्रे॑ मही॒युवः॑ ॥ (१)
सबके द्वारा अभिलाषा योग्य एवं शत्रुओं को नष्ट करने वाले सोम के लिए पौरुष प्रकट करने वाले धनुष पर डोरी चढ़ाई जाती है. पूजा के अभिलाषी ऋत्विज्‌ लोग बुद्धिमान्‌ देवों के आगे शक्तिशाली सोम के लिए सफेद रंग का दशापवित्र फैलाते हैं. (१)
A string is offered on the bow that expresses virility for Soma, who is worthy of desire and destroys enemies by all. The Ritvijs, who are eager to worship, spread a white dashapavitra for the powerful Soma in front of the wise gods. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
अध॑ क्ष॒पा परि॑ष्कृतो॒ वाजा॑ँ अ॒भि प्र गा॑हते । यदी॑ वि॒वस्व॑तो॒ धियो॒ हरिं॑ हि॒न्वन्ति॒ यात॑वे ॥ (२)
रात बीतने पर जलों से सुशोभित सोम अन्नों को लक्ष्य करके जाते हैं. सेवा करने वाले यजमान की कर्म करने वाली दस उंगलियां हरे रंग के सोम को पात्र में भेजती हैं. (२)
As the night passes, the mons adorned with water go aiming at the grains. The ten fingers that perform the deeds of the serving host send the green mon into the vessel. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
तम॑स्य मर्जयामसि॒ मदो॒ य इ॑न्द्र॒पात॑मः । यं गाव॑ आ॒सभि॑र्द॒धुः पु॒रा नू॒नं च॑ सू॒रयः॑ ॥ (३)
हम सोम के उस रस को शुद्ध करते हैं, जो नशीला एवं इंद्र के द्वारा अत्यंत पेय है. गतिशील स्तोता उस रस को पहले भी मुखों द्वारा पीते थे और इस समय भी पीते हैं. (३)
We purify the juice of Soma, which is intoxicating and extremely drinkable by Indra. The dynamic stota used to drink that juice through the mouths before and also drink it at this time. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
तं गाथ॑या पुरा॒ण्या पु॑ना॒नम॒भ्य॑नूषत । उ॒तो कृ॑पन्त धी॒तयो॑ दे॒वानां॒ नाम॒ बिभ्र॑तीः ॥ (४)
स्तोतागण प्राचीन गाथाओं द्वारा शुद्ध होते हुए सोम की स्तुति करते हैं. देवों के कार्य के लिए मुड़ने वाली उंगलियां देवों को सोम-रूप हवि देने के लिए समर्थ होती हैं. (४)
The Stotagans praise Soma, being purified by ancient sagas. The fingers that turn for the work of the gods are able to give the gods the form of soma-form. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
तमु॒क्षमा॑णम॒व्यये॒ वारे॑ पुनन्ति धर्ण॒सिम् । दू॒तं न पू॒र्वचि॑त्तय॒ आ शा॑सते मनी॒षिणः॑ ॥ (५)
मेधावी यजमान पानी से भीगे हुए एवं सबको धारण करने वाले सोम को भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर शुद्ध करते हैं एवं देवों को अपनी बात बताने के लिए दूत के समान सोम की प्रार्थना करते हैं. (५)
The bright hosts purify the water-soaked and all-clad Mon on the dashapavitra made of sheep's hair and pray to Som like an angel to tell the gods their point of view. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
स पु॑ना॒नो म॒दिन्त॑मः॒ सोम॑श्च॒मूषु॑ सीदति । प॒शौ न रेत॑ आ॒दध॒त्पति॑र्वचस्यते धि॒यः ॥ (६)
अत्यंत नशीले सोम शुद्ध होकर चमू नामक पात्रों में स्थित होते हैं. गाय में वीर्य धारण करने वाले बैल के समान चमू पात्रों में रस डालने वाले एवं यज्ञकर्म के स्वामी सोम की स्तुति की जाती है. (६)
The highly intoxicating mons are purely located in characters called Chamu. Like a bull holding semen in a cow, Som, who pours juice in the tamu pots and the lord of the yagnakarma, is praised. (6)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
स मृ॑ज्यते सु॒कर्म॑भिर्दे॒वो दे॒वेभ्यः॑ सु॒तः । वि॒दे यदा॑सु संद॒दिर्म॒हीर॒पो वि गा॑हते ॥ (७)
देवों के लिए निचोड़े गए एवं दीप्तिशाली सोम को ऋत्विज्‌ शुद्ध करते हैं. प्रजाओं में भली प्रकार दान करने वाले माने गए सोम महान्‌ जल में नहाते हैं. (७)
Ritvijs purify the squeezing and glistening mona squeezed for the gods. Som, who is considered to be a good donor among the subjects, bathes in great water. (7)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
सु॒त इ॑न्दो प॒वित्र॒ आ नृभि॑र्य॒तो वि नी॑यसे । इन्द्रा॑य मत्स॒रिन्त॑मश्च॒मूष्वा नि षी॑दसि ॥ (८)
हे निचुड़े हुए और विस्तृत सोम! तुम ऋत्विजों द्वारा दशापवित्र पर ले जाए जाते हो. हे अत्यंत नशीले सोम! तुम इंद्र के लिए चमू नामक पात्रों में बैठते हो. (८)
O unkempt and detailed Mon! You are taken to dashapavitra by the ritvaijs. Oh extremely intoxicating Mon! You sit in characters called Chamu for Indra. (8)