हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.99.3

मंडल 9 → सूक्त 99 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 99
तम॑स्य मर्जयामसि॒ मदो॒ य इ॑न्द्र॒पात॑मः । यं गाव॑ आ॒सभि॑र्द॒धुः पु॒रा नू॒नं च॑ सू॒रयः॑ ॥ (३)
हम सोम के उस रस को शुद्ध करते हैं, जो नशीला एवं इंद्र के द्वारा अत्यंत पेय है. गतिशील स्तोता उस रस को पहले भी मुखों द्वारा पीते थे और इस समय भी पीते हैं. (३)
We purify the juice of Soma, which is intoxicating and extremely drinkable by Indra. The dynamic stota used to drink that juice through the mouths before and also drink it at this time. (3)