हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.3.9

अध्याय 1 → खंड 3 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 3
तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गरः । स पावक श्रुधी हवम् ॥ (९)
हे अग्नि! गोपवन ऋषि ने आप को अपनी स्तुति से उत्पन्न किया है. आप अंगों में रस के रूप में निवास करते हैं. आप पवित्र करने वाले हैं. आप हमारी प्रार्थना सुनिए. (९)
O agni! Gopvan Rishi has created you with his praise. You reside in the organs in the form of juice. You are going to sanctify. You listen to our prayers. (9)