हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.7.2

अध्याय 1 → खंड 7 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 7
चित्र इच्छिशोस्तरुणस्य वक्षथो न यो मातरावन्वेति धातवे । अनूधा यदजीजनदधा चिदा ववक्षत्सद्यो महि दूत्या३ं चरन् ॥ (२)
हे अग्नि! बाल एवं तरुण (युवा) रूप आप का हवि पहुंचाना बहुत आश्चर्य वाला है. आप पैदा होने के बाद दूध पीने के लिए अपनी दोनों ही माताओं (पृथ्वी और अरणियों) के पास नहीं जाते, बल्कि अच्छे दूत की भूमिका निभाते हुए देवताओं के पास हवि पहुंचाने जाते हैं. (२)
O agni! It is very surprising to see you in the form of child and youth. After being born, you do not go to both your mothers (earth and arans) to drink milk, but play the role of a good messenger and go to the gods to deliver havi. (2)