हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 10.4.6

अध्याय 10 → खंड 4 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 10)

सामवेद: | खंड: 4
तरणिरित्सिषासति वाजं पुरन्ध्या युजा । आ व इन्द्रं पुरुहूतं नमे गिरा नेमिं तष्टेव सुद्रुवम् ॥ (६)
हे इंद्र! हम आप के उपासक हैं. हम भव सागर पार करना चाहते हैं. हम बुद्धि का बल (शारीरिक बल के साथसाथ) भी पाना चाहते हैं. चलता हुआ पहिया जैसे एकदम नीचे आ जाता है, वैसे ही हम प्रार्थना रूपी पहिए से इंद्र के लिए झुक जाते हैं. (६)
O Indra! We are worshippers of you. We want to cross bhav sagar. We also want to get the strength of intelligence (along with physical strength). As the moving wheel comes down, we bow down to Indra with the wheel of prayer. (6)