हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 10.5.1

अध्याय 10 → खंड 5 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 10)

सामवेद: | खंड: 5
तिस्रो वाच उदीरते गावो मिमन्ति धेनवः । हरिरेति कनिक्रदत् ॥ (१)
यजमान तीन वाणियां उचारते हैं. उन वाणियों को सुन कर हरे रंग का सोमरस दुधारू गाय के रंभाने जैसी आवाज करता हुआ प्रवाहित होता है. (१)
The host utters three vows. Hearing those words, the green sommers flows, making a sound like a milch cow's rambhane. (1)