हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 10.5.2

अध्याय 10 → खंड 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 10)

सामवेद: | खंड: 5
अभि ब्रह्मीरनूषत यह्वीरृतस्य मातरः । मर्जयन्तीर्दिवः शिशुम् ॥ (२)
हम यजमान स्वर्गलोक के शिशु सोम को परिष्कृत करने के लिए मंत्र उचारते हैं. सत्य की माता से सोम उत्पन्न हुए हैं. ब्रह्मज्ञानी सोम की उपासना करते हैं. (२)
We chant mantras to refine the infant Soma of the host heaven. Soma is born from the mother of truth. Brahmagyani worships Soma. (2)