हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 10.5.3

अध्याय 10 → खंड 5 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 10)

सामवेद: | खंड: 5
रायः समुद्राँश्चतुरोऽस्मभ्यँ सोम विश्वतः । आ पवस्व सहस्रिणः ॥ (३)
हे सोम! आप हमें सभी प्रकार के सुख दीजिए. आप हमें सभी प्रकार के धन दीजिए. आप हमारी हजारों इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रवाहित होने की कृपा कीजिए. (३)
O Mon! You give us all kinds of happiness. You give us all kinds of money. Please flow to fulfill our thousands of wishes. (3)