सामवेद (अध्याय 10)
रायः समुद्राँश्चतुरोऽस्मभ्यँ सोम विश्वतः । आ पवस्व सहस्रिणः ॥ (३)
हे सोम! आप हमें सभी प्रकार के सुख दीजिए. आप हमें सभी प्रकार के धन दीजिए. आप हमारी हजारों इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रवाहित होने की कृपा कीजिए. (३)
O Mon! You give us all kinds of happiness. You give us all kinds of money. Please flow to fulfill our thousands of wishes. (3)