सामवेद (अध्याय 11)
आ पवमान सुष्टुतिं वृष्टिं देवेभ्यो दुवः । इषे पवस्व संयतम् ॥ (९)
हे सोम! आप शुद्ध व प्रशंसा के योग्य हैं. आप अपने रस की वर्षा वैसे ही हम पर करिए, जैसे देवता हमारे लिए अन्न और आशीर्वादों की वर्षा करते हैं. (९)
O Mon! You are pure and worthy of praise. You shower your juice on us just as the gods shower food and blessings for us. (9)