हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 11.4.3

अध्याय 11 → खंड 4 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 4
पवमान धिया हितो३ऽभि योनिं कनिक्रदत् । धर्मणा वायुमारुहः ॥ (३)
हे सोम! बुद्धिपूर्वक आप की प्रतिष्ठा की जाती है. आप हितकारी हैं और आवाज करते हुए द्रोणकलश में प्रवेश करते हैं. आप वायु के साथ कलश में स्थापित होइए. (३)
O Mon! You are intellectually distinguished. You are benevolent and enter Dronakalsh by making a sound. You install in the urn with air. (3)