सामवेद (अध्याय 11)
नू नो रयिं महामिन्दोऽस्मभ्यँ सोम विश्वतः । आ पवस्व सहस्रिणम् ॥ (८)
हे सोम! आप तृप्तिकारक हैं. आप हजार धाराओं से झरिए. आप सभी ओर से सब प्रकार का वैभव हमें प्रदान करने की कृपा कीजिए. (८)
O Mon! You are satiating. You jump from a thousand streams. Please give us all kinds of splendour from all sides. (8)