हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.3.9

अध्याय 12 → खंड 3 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 3
वाचमष्टापदीमहं नवस्रक्तिमृतावृधम् । इन्द्रात्परितन्वं ममे ॥ (९)
हे इंद्र! अमृत की बढ़ोतरी करने वाली नई कल्पनाओं से परिपूर्ण, आठ पदों वाली स्तुति स्वीकार करने की कृपा कीजिए. (९)
O Indra! Please accept the praise of eight verses, full of new fantasies that increase nectar. (9)