हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.4.5

अध्याय 12 → खंड 4 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 4
अनूपे गोमान्गोभिरक्षाः सोमो दुग्धाभिरक्षाः । समुद्रं न संवरणान्यग्मन्मन्दी मदाय तोशते ॥ (५)
हे सोम! नदियां जैसे समुद्र का वरण कर के स्थिर होती हैं, उसी प्रकार सोमरस द्रोणकलश में पहुंच कर स्थिर हो रहा है. सोमरस अनुपम, गो से युक्त, आनंददायी व पोषक है. (५)
O Mon! Just as rivers are stable by selecting the sea, so Someras is stabilizing by reaching Dronalash. Someras is unique, go-rich, enjoyable and nutritious. (5)