सामवेद (अध्याय 12)
यत्सोम चित्रमुक्थ्यं दिव्यं पार्थिवं वसु । तन्नः पुनान आ भर ॥ (६)
हे सोम! आप दिव्य व अदभुत हैं. पृथ्वी पर जो भी ऐश्वर्य है, वह सब आप हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (६)
O Mon! You are divine and wonderful. Whatever opulence is there on earth, please get all that you have. (6)