हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.6.4

अध्याय 12 → खंड 6 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 6
अभि द्युभ्नं बृहद्यश इषस्पते दीदिहि देव देवयुम् । वि कोशं मध्यमं युव ॥ (४)
हे सोम! आप वन की उपज (वनस्पति) के स्वामी हैं. आप हमें ऐसा वैभव प्रदान करने की कृपा कीजिए, जिसे पाने के लिए देवगण भी इच्छुक हों. आप यज्ञशाला के बीचोबीच श्रेष्ठ स्थान पर प्रतिष्ठित होने की कृपा कीजिए. (४)
O Mon! You are the owner of the forest produce (vegetation). Please give us such glory, which the Gods are also willing to get. Please be revered at the highest place in the middle of the Yagyashala. (4)