सामवेद (अध्याय 12)
आ वच्यस्व सुदक्ष चम्वोः सुतो विशां वह्निर्न विश्पतिः । वृष्टिं दिवः पवस्व रीतिमपो जिन्वन्गविष्टये धियः ॥ (५)
हे सोम! आप बुद्धिमान हैं. आप यजमान को भी ऐसी बुद्धि देते हैं, जिस से वे उपयुक्त मार्ग पर जा सकें. आप राजा की भांति सब का भरणपोषण करते हैं. आप स्वर्गलोक से होने वाली वर्षा की तरह बरसिए (प्रवाहित होइए). आप द्रोणकलश में स्थापित होने की कृपा कीजिए. (५)
O Mon! You are intelligent. You also give the host such intelligence that they can go on the right path. You feed everyone like a king. You rain like rain from heaven( flow). Please be established in Drona kalash. (5)