हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.2.12

अध्याय 13 → खंड 2 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 2
उस्रा वेद वसूनां मर्त्तस्य देव्यवसः । तरत्स मन्दी धावति ॥ (१२)
हे सोम! आप सभी वैभवों के स्वामी व दिव्य हैं. आप मनुष्यों (यजमानों) के संरक्षक हैं. आप के रस की धाराएं वेग से बहती हैं. (१२)
O Mon! You are the swami of all splendour and divine. You are the protector of human beings (hosts). The streams of your juice flow at a velocity. (12)