सामवेद (अध्याय 13)
आ ययोस्त्रिँशतं तना सहस्राणि च दद्महे । तरत्स मन्दी धावति ॥ (१४)
हे सोम! आप ध्वस्र और पुरुषंति के तीन सौ और तीन हजार वस्त्र हमें देने की कृपा कीजिए. आप की धाराएं वेग से बहती हैं. (१४)
O Mon! Please give us three hundred and three thousand clothes of dust and masculinity. Your currents flow at a velocity. (14)