हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.2.16

अध्याय 13 → खंड 2 → मंत्र 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 2
अभि गव्यानि वीतये नृम्णा पुनानो अर्षसि । सनद्वाजः परि स्रव ॥ (१६)
हे सोम! आप मनुष्यों को सुख देते हैं. देवता आप का सेवन करते हैं. इसीलिए आप को गौ दूध में मिलाया जाता है. आप अन्न प्रदान करते हुए कलश में ख्रवित होते (झरते) हैं. (१६)
O Mon! You give happiness to human beings. God consumes you. That is why you are mixed in cow milk. You are saved (falling) in the kalash while providing food. (16)