सामवेद (अध्याय 13)
सना दक्षमुत क्रतुमप सोम मृधो जहि । अथा नो वस्यसस्कृधि ॥ (३)
हे सोम! आप हमें बलवान व कर्तव्यपरायण बनाइए. शत्रुनाश कर के आप हमें सुखी बनाइए. (३)
O Mon! You make us strong and dutiful. Destroy enemies and make us happy. (3)
अध्याय 13 → खंड 2 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation