हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.3.10

अध्याय 13 → खंड 3 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 3
यज्ञस्य हि स्थ ऋत्विजा सस्नी वाजेषु कर्मसु । इन्द्राग्नी तस्य बोधतम् ॥ (१०)
हे इंद्र! हे अग्नि! आप यज्ञ के ऋत्विजू हैं. यज्ञ के कामों में आप की पवित्रता बनी रहती है. आप हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान देने की कृपा कीजिए. (१०)
O Indra! O agni! You are the ritviju of yajna. Your purity remains in the works of yajna. Please pay attention to our prayers. (10)