हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.4.8

अध्याय 13 → खंड 4 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 4
स नो भगाय वायवे पूष्णे पवस्व मधुमान् । चारुर्मित्रे वरुणे च ॥ (८)
हे सोम! आप पवित्र, मधुर व सुंदर हैं. आप को भग, वायु, पूषा, मित्र और वरुण के लिए परिष्कृत किया जाता है. (८)
O Mon! You are pure, sweet and beautiful. You are refined for Bhaga, Vayu, Pusha, Mitra and Varuna. (8)