हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.5.7

अध्याय 13 → खंड 5 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 5
उभे यदिन्द्र रोदसी आपप्राथोषा इव । महान्तं त्वा महीनाँ सम्राजं चर्षणीनाम् । देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत् ॥ (७)
हे इंद्र! आप भी उषा की भांति स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को अपने प्रकाश से भरने की कृपा कीजिए. आप महान, महिमाशाली, पृथ्वी के राजा व अदिति आप की जननी है. (७)
O Indra! Please fill heaven and earth with your light like Usha. You are great, glorious, king of the earth and Aditi is your mother. (7)