हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.5.8

अध्याय 13 → खंड 5 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 5
दीर्घँ ह्यङ्कुशं यथा शक्तिं बिभर्षि मन्तुमः । पूर्वेण मघवन्पदा वयामजो यथा यमः । देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत् ॥ (८)
हे इंद्र! आप ज्ञान के भंडार, शक्ति व सामर्थ्य धारक हैं. आप को देवताओं की माता ने जना है. आप को कल्याणकारिणी जननी ने जना है. बकरा जैसे आगे के पैरों से अपने भोज्य पदार्थों को नियंत्रित करता है, उसी तरह आप दुष्टों को वश में करते हैं. (८)
O Indra! You are a storehouse of knowledge, power and power. You have been born by the mother of gods. You have been born by Kalyankarini Janani. Just as a goat controls its food items with the front legs, you subdue the wicked. (8)