हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.5.9

अध्याय 13 → खंड 5 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 5
अव स्म दुर्हृणायतो मर्त्तस्य तनुहि स्थिरम् । अधस्पदं तमीं कृधि यो अस्माँ अभिदासति । देवी जनित्र्यजीजनद्भद्रा जनित्र्यजीजनत् ॥ (९)
हे इंद्र! आप को देवताओं की माता ने जना है. आप को कल्याणकारिणी माता ने जना है. आप हमें अधीन (पराधीन) बनाने वाले दुष्ट शन्रुओं का नाश करने की कृपा कीजिए. (९)
O Indra! You have been born by the mother of gods. You have been born by Kalyankarini Mata. Please destroy the evil enemies who subjugated us. (9)