सामवेद (अध्याय 13)
उप प्रक्षे मधुमति क्षियन्तः पुष्येम रयिं धीमहे त इन्द्र ॥ (९)
हे इंद्र! आप के संरक्षण में रहने वाले हम याजक बलिष्ठ हों और धान्य से युक्त हों. (९)
O Indra! We priests living under your protection should be strong and full of grain. (9)