सामवेद (अध्याय 14)
तमीडिष्व यो अर्चिषा वना विश्वा परिष्वजत् । कृष्णा कृणोति जिह्वया ॥ (१०)
हे अग्नि! आप अपनी जिह्वा से सारे वनों को काला कर देते हैं. हमें उन बलशाली अग्नि की अर्चना करनी चाहिए. (१०)
O agni! You blacken all the forests with your tongue. We should worship those powerful agnis. (10)