हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
प्रो अयासीदिन्दुरिन्द्रस्य निष्कृतँ सखा सख्युर्न प्र मिनाति सङ्गिरम् । मर्य इव युवतिभिः समर्षति सोमः कलशे शतयाम्ना पथा ॥ (१)
कई विधियों से परिष्कृत शुद्ध सोमरस इंद्र के पेट में पहुंच रहा है. यह सोमरस इंद्र के पेट में अच्छी तरह पच जाता है. जैसे युवा स्त्रियों के साथ रमण करता है, वैसे ही सोमरस सैकड़ों मार्गों से कलश में प्रतिष्ठित होता है. (१)
Pure Someras, refined by many methods, is reaching Indra's stomach. This somerus is well digested in Indra's stomach. Just as he meditates with young women, Somaras is distinguished in the urn from hundreds of passages. (1)

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
प्र वो धियो मन्द्रयुवो विपन्युवः पनस्युवः संवरणेष्वक्रमुः । हरिं क्रीडन्तमभ्यनूषत स्तुभोऽभि धेनवः पयसेदशिश्रयुः ॥ (२)
हे सोम! जो यजमान बुद्धिपूर्वक आप को परिष्कृत करते हैं, वे आनंदपूर्वक अपनी इच्छापूर्ति का लाभ पाते हैं. गौएं अपने दूध से सोमरस को सींचती हैं. वह खेलता (लहराता) हुआ घड़े में पहुंचता है. (२)
O Mon! The hosts who refine you wisely enjoy their desire. Cows irrigate somers with their milk. He reaches the pitcher playing (waving). (2)

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
आ नः सोम संयतं पिप्युषीमिषमिन्दो पवस्व पवमान ऊर्मिणा । या नो दोहते त्रिरहन्नसश्चुषी क्षुमद्वाजवन्मधुमत्सुवीर्यम् ॥ (३)
हे सोम! आप पवित्र हैं और लहरों से लहराते हुए प्रवाहित होइए. सोमरस का तीनों संध्याओं (सवनों) में प्रयोग में किया जाता है. वह अन्नमय व श्रेष्ठ वीर्य वाला है. (३)
O Mon! You are holy and flow with waves. Someras is used in all three evenings (savanas). He is annamay and superior semen. (3)

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
न किष्टं कर्मणा नशद्यश्चकार सदावृधम् । इन्द्रं न यज्ञैर्विश्वगूर्त्तमृभ्वसमधृष्टं धृष्णुमोजसा ॥ (४)
हे इंद्र! आप सदैव बढ़ोतरी करने वाले, शत्रुओं को हराने वाले व अपराजित हैं. जो यजमान आप की उपासना करते हैं, उन के कर्मो को कोई नष्ट नहीं कर सकता. (४)
O Indra! You are always the one who increases, defeats enemies and is undefeated. No one can destroy the deeds of the hosts who worship you. (4)

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
अषाढमुग्रं पृतनासु सासहिं यस्मिन्महीरुरुज्रयः । सं धेनवो जायमाने अनोनवुर्द्यावः क्षामीरनोनवुः ॥ (५)
जब इंद्र प्रकट होते हैं तो वेगवती गौएं उन्हें नमस्कार करती हैं. स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक झुक कर उन का अभिवादन करते हैं. हम भी उन की अभ्यर्थना करते हैं. (५)
When Indra appears, the vegvati cows greet him. Heaven and earthland bow down and greet them. We also recommend them. (5)