हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 14.4.5

अध्याय 14 → खंड 4 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 4
अषाढमुग्रं पृतनासु सासहिं यस्मिन्महीरुरुज्रयः । सं धेनवो जायमाने अनोनवुर्द्यावः क्षामीरनोनवुः ॥ (५)
जब इंद्र प्रकट होते हैं तो वेगवती गौएं उन्हें नमस्कार करती हैं. स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक झुक कर उन का अभिवादन करते हैं. हम भी उन की अभ्यर्थना करते हैं. (५)
When Indra appears, the vegvati cows greet him. Heaven and earthland bow down and greet them. We also recommend them. (5)