सामवेद (अध्याय 14)
प्र सोम याहीन्द्रस्य कुक्षा नृभिर्येमानो अद्रिभिः सुतः ॥ (६)
पत्थरों से कूट कर निकाले हुए सोमरस को यजमानों ने स्तुतियों से परिष्कृत कर दिया है. वह सोमरस इंद्र के पेट में पहुंचने की कृपा करे. (६)
Someras, crushed with stones, has been refined by the hosts with praises. May he please reach someras indra's stomach. (6)