सामवेद (अध्याय 15)
वृष्टिं दिवः परि स्रव द्युम्नं पृथिव्या अधि । सहो नः सोम पृत्सु धाः ॥ (१२)
हे सोम! आप स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक पर दिव्यता की वर्षा करने की कृपा कीजिए. आप अन्नधन दीजिए. हम शत्रुओं को सह न सकें, ऐसी क्षमता दीजिए. (१२)
O Mon! Please shower divinity on heaven and earth. You give food. Give us such capability so that we cannot tolerate enemies. (12)