हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
शिशुं जज्ञानँ हर्यतं मृजन्ति शुम्भन्ति विप्रं मरुतो गणेन । कविर्गीर्भिः काव्येना कविः सन्त्सोमः पवित्रमत्येति रेभन् ॥ (१)
हे सोम! आप ब्राह्मण हैं. आप बच्चे की तरह सब के मन को खिला देते हैं. मरुद्गण आप को परिमार्जित करते हैं. कवि काव्यों से आप की स्तुति करते हैं. आप आवाज करते हुए पवित्र हो जाते हैं. (१)
O Mon! You are a Brahmin. You feed everyone's mind like a child. Deserts refine you. Poets praise you with poems. You become holy while making a sound. (1)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
ऋषिमना य ऋषिकृत्स्वर्षाः सहस्रनीथः पदवीः कवीनाम् । तृतीयं धाम महिषः सिषासन्त्सोमो विराजमनु राजति ष्टुप् ॥ (२)
हे सोम! आप ऋषियों जैसे मन वाले और उन जैसा गुण प्रदान करने वाले हैं. आप तीसरे धाम के राजा इंद्र को और तेजस्वी बनाने वाले हैं. आप कवियों की पदवी और सहस्रकर्मा हैं. (२)
O Mon! You are like sages with a mind and a quality like them. You are going to make Indra, the king of the third dham, more stunning. You are the title of poet and sahasrakarma. (2)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत् । अपामूर्मिँ सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति ॥ (३)
हे सोम! आप अस्त्रशस्त्रधारी हैं व गायों के दूध में मिलाए जाते हैं. आप की लहरें समुद्र की लहरों के समान और राजा हैं. आप तुरीय धाम (मोक्ष धाम) में विराजते व सुशोभित होते हैं. (३)
O Mon! You are a weapon and are mixed with cow's milk. The waves of you are similar to the waves of the sea and the king. You sit and adorn in turiya dham (moksha dham). (3)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
एते सोमा अभि प्रियमिन्द्रस्य काममक्षरन् । वर्धन्तो अस्य वीर्यम् ॥ (४)
ये सोम इंद्र को प्रिय हैं. सोम कामनाओं की वर्षा करते हैं. ये उन के (इंद्र के) वीर्य को बढ़ाने वाले हैं. (४)
These are dear to Som Indra. Som showers wishes. These are going to increase his (Indra's) semen. (4)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
पुनानासश्चमूषदो गच्छन्तो वायुमश्विना । ते नो धत्त सुवीर्यम् ॥ (५)
हे सोम! आप पवित्र हैं. आप वायु और अश्वििनीकुमारों के साथ जाइए, जिस से हम श्रेष्ठ वीर्य धारण कर सकें. (५)
O Mon! You are holy. You go with vayu and ashwinikumaras, so that we can have the best semen. (5)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय । देवानां योनिमासदम् ॥ (६)
हे सोम! आप पवित्र हैं. आप इंद्र की आराधना हेतु हमें हार्दिक प्रेरणा देने की कृपा कीजिए. हम देव योनि के अनुकूल कार्य (यज्ञ) कर सकें. (६)
O Mon! You are holy. Please give us a warm inspiration to worship Indra. We can do work (yajna) according to dev yoni. (6)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
मृजन्ति त्वा देश क्षिपो हिन्वन्ति सप्त धीतयः । अनु विप्रा अमादिषुः ॥ (७)
हे सोम! यजमान की दसों अंगुलियां आप को परिमार्जित करती हैं. सात पुरोहित आप को तृप्ति प्रदान करते हैं. हम ब्राह्मण आप का अनुगमन करते हैं. (७)
O Mon! The host's ten fingers scrape you. Seven priests give you satisfaction. We Brahmins follow you. (7)

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 1
देवेभ्यस्त्वा मदाय कँ सृजानमति मेष्यः । स गोभिर्वासयामसि ॥ (८)
हे सोम! आप मददायी, सुखदायी व सुख सिरजने (पैदा करने) वाले हैं. देवताओं को भेंट करने के लिए हम आप को गाय के दूध में मिलाते हैं. (८)
O Mon! You are the one who is intoxicating, happy and happy. To offer to the gods, we mix you in cow's milk. (8)
Page 1 of 2Next →