सामवेद (अध्याय 15)
चमूषच्छ्येनः शकुनो विभृत्वा गोविन्दुर्द्रप्स आयुधानि बिभ्रत् । अपामूर्मिँ सचमानः समुद्रं तुरीयं धाम महिषो विवक्ति ॥ (३)
हे सोम! आप अस्त्रशस्त्रधारी हैं व गायों के दूध में मिलाए जाते हैं. आप की लहरें समुद्र की लहरों के समान और राजा हैं. आप तुरीय धाम (मोक्ष धाम) में विराजते व सुशोभित होते हैं. (३)
O Mon! You are a weapon and are mixed with cow's milk. The waves of you are similar to the waves of the sea and the king. You sit and adorn in turiya dham (moksha dham). (3)