हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.7.9

अध्याय 15 → खंड 7 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 7
उभयँ श‍ृणवच्च न इन्द्रो अर्वागिदं वचः । सत्राच्या मघवान्त्सोमपीतये धिया शविष्ठ आ गमत् ॥ (९)
हे इंद्र! आप हमारे यज्ञ में पधार कर हमारी दोनों प्रकार की वाणियों को सुनने की कृपा कीजिए. आप बलिष्ठ व संपन्न हैं. आप हमारी उपासना से प्रसन्न होइए. आप सोमपान करने के लिए हमारे यज्ञ में पधारिए. (९)
O Indra! Please come to our yajna and listen to both our kinds of speeches. You are strong and prosperous. Please be pleased with our worship. You come to our yagna to do sompan. (9)