सामवेद (अध्याय 15)
पवमान नि तोशसे रयिँ सोम श्रवाय्यम् । इन्दो समुद्रमा विश ॥ (२)
हे सोम! आप पवित्र व संतुष्टिदायक हैं. आप दुष्टों को दंड देने की कृपा कीजिए. हम आप का आह्वान करते हैं. (२)
O Mon! You are pure and gratifying. Please punish the wicked. We call upon you. (2)