हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.8.3

अध्याय 15 → खंड 8 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 8
अपघ्नन्पवसे मृधः क्रतुवित्सोम मत्सरः । नुदस्वादेवयुं जनम् ॥ (३)
हे सोम! आप पवित्र हैं. आप यज्ञ की क्रियाविधि जानने वाले हैं. आप ईष्यालुओं और नास्तिकों को दूर करने की कृपा कीजिए. आप का प्रभाव देवताओं जैसा (दिव्य) है. (३)
O Mon! You are holy. You are going to know the procedure of yajna. Please remove the gods and atheists. Your influence is like the gods (divine). (3)