हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.9.6

अध्याय 15 → खंड 9 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 9
त्वँ हि शश्वतीनामिन्द्र धर्त्ता पुरामसि । हन्ता दस्योर्मनोर्वृधः पतिर्दिवः ॥ (६)
हे इंद्र! आप स्वर्गलोक के पति एवं शाश्वत हैं. आप नगरों को धारण करने वाले, दस्युओं का नाश करने वाले व मनोबल की बढ़ोतरी करने वाले हैं. (६)
O Indra! You are the husband of heaven and eternal. You are the one who holds the cities, destroys the bandits and increases the morale. (6)