सामवेद (अध्याय 16)
त्वँ सुतो मदिन्तमो दधन्वान्मत्सरिन्तमः । इन्दुः सत्राजिदस्तृतः ॥ (२)
हे सोम! आप मददायी, बलधारी, यज्ञ के मूलाधार, प्रकाशित, स्फूर्तिदायी और शत्रुओं को जीतने वाले हैं. आप को जीता नहीं जा सकता. (२)
O Mon! You are the madadya, the forceful, the foundation of yajna, illuminated, energized and conquering enemies. You can't be won. (2)