हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.11.1

अध्याय 16 → खंड 11 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 11
त्वँ सोमासि धारयुर्मन्द्र ओजिष्ठो अध्वरे । पवस्व मँहयद्रयिः ॥ (१)
हे सोम! आप बलिष्ठ व पवित्र हैं. आप यज्ञ में धारा से वैभवयुक्त मार्ग बनाते हैं. आप धनदाता व शक्तिदाता हैं. आप शुद्ध हो कर कलश में विराजिए. (१)
O Mon! You are strong and holy. You make a glorious path from the stream in the yajna. You are a money giver and a power giver. You should be pure and sit in the urn. (1)